आध्यात्मिक लेखन · हिन्दी
CA. Jayesh Sheth के आत्मज्ञान, आत्मा और धर्म पर हिन्दी निबंध और प्रवचन।
Discourse · प्रश्नोत्तर
आत्मा, सम्यग्दर्शन और मोक्षमार्ग पर प्रश्नोत्तर
प्रश्न – धर्म यानी क्या?
धर्म का सामान्य अर्थ सम्प्रदाय समझा जाता है, परन्तु धर्म का सच्चा अर्थ वस्तु का स्वभाव (गुणधर्म) है।
प्रश्न – आत्मा का स्वभाव (गुणधर्म) क्या है?
आत्मा का स्वभाव (गुणधर्म अर्थात् लक्षण) जानना और देखना है।
प्रश्न – आत्मा की पहचान क्या है? उसका अनुभव कैसे हो सकता है?
सभी को अपने भाव, ज्ञान, चेतना आदि का अनुभव होता है, किन्तु वे स्वयं को आत्मा न मानकर शरीर मानते हैं — यही मिथ्यात्व है। यदि हम स्वयं को शरीर मानें, तो आँख सही होने पर भी मृत्यु के बाद वह आँख नहीं देख सकती; परन्तु वही आँख यदि किसी जीवित व्यक्ति के शरीर में प्रत्यारोपित की जाए तो वह देख सकती है। इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि जानने-देखने वाली आत्मा मृत शरीर से निकल चुकी है, जबकि वही जानने-देखने वाली आत्मा जीवित शरीर में विद्यमान है, जिससे वह देख सकता है।
इसी प्रकार जानने-देखने वाली आत्मा की पहचान करके यह समझना चाहिये कि आँखों के द्वारा जो देखा जाता है, वह देखने वाला ज्ञायक आत्मा मैं स्वयं हूँ, आँख नहीं। आत्मा की वैराग्यादि योग्यता पाकर पर की इच्छाओं से विरत होकर आत्मसन्मुखता पाकर ऐसा अनुभव करना कि "वह मैं हूँ, सोऽहम् — मैं केवल ज्ञानमात्र स्वरूप शुद्ध आत्मा हूँ" — यही अनुभव (सम्यग्दर्शन) की विधि है।
प्रश्न – सम्यग्दर्शन के लिए क्या योग्यताएँ आवश्यक हैं?
सामान्य रूप से:
ये सब आवश्यक योग्यताएँ हैं।